आप किस श्रेणी के है।
हेलो दोस्तों में मुकेश आपके लिए लाया हु एक छोटी सी स्टोरी डॉ उज्जवल पाटनी की पॉवरफुल बुक " पावर थिंकिंग " से अगर आप एक बुक लवर है तो आपने ये बुक जरूर पढ़ी होगी, और अगर नहीं पढ़ी तो आपको ये बुक पढ़नी चाहिए।
पावर थिंकिंग पॉजिटिव थिंकिंग से आगे बढ़कर प्रैक्टिकल, शक्तिशाली, आत्मनिर्भर, और दूरदर्शी बनने की राह दिखाती है।
इसके लिए हमें पॉजिटिव थिंकिंग को त्यागना नहीं है, परन्तु एक कदम आगे बढ़कर पावर थिंकिंग को अपनाना है।
तीन भाइयो ने पढाई के बाद नौकरी के लिए शहर का रुख किया। सयोंगवश उनकी नौकरी एक ही कंपनी में लग गयी।
विदेश में नौकरी करने वाले उनके पिता जब दो साल बाद वापस लौटे तो पुत्रो की तरक्की देख कर बहुत खुश हुए।
उन्होंने तीनो पुत्रो से उनकी तनख्वाह पूछी। बड़े ने कहा 30 हजार, मंझले ने कहा 40 हजार, और सबसे छोटे ने कहा 60 हजार।
पिता चकित हो गए क्योकि एक जैसी डिग्री और एक ही कंपनी में नौकरी के बाद भी तनख्वाह में बेहद फर्क था। पिता अगले दिन कंपनी के प्रमुख से मिले और इसका कारण पूछा। प्रमुख ने पिता से कहा- की वो उनके साथ बैठकर स्वयं देखे।
कंपनी प्रमुख ने बड़े पुत्र को बुलाया और कहा - पास ही समुद्र तट पर एक जहाज में कुछ माल है, जिसकी नीलामी होने जा रही है। तुरंत पता करो क्या माल है, और क्या कुछ लाभ का सौदा हो सकता है। यही कार्य अन्य दो भाइयो को भी सौपा।
सबसे बड़ा भाई 10 मिनट में लौटकर चला आया। उसने जानकारी दी कि जहाज में कुछ कपडा और कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान है।
प्रमुख ने पूछा - यह कैसे पता चला। बड़े भाई ने कहा - किसी परिचित से फ़ोन करके पूछा है।
मंझला भाई लगभग दो घंटे बाद लौटकर आया। उसने बताया की जहाज में 100 टीवी है, लगभग 10 हजार मीटर कपडा है, और 500 कंप्यूटर है।
प्रमुख ने पूछा - टीवी चालू है या बंद, कपडा किस क्वालिटी का है, और कंप्यूटर किस कंपनी का है। मंझले भाई ने कहा- इतनी बारीक़ जानकारी पूछने के लिए आपने कहा नहीं था, इसलिए नहीं पूछा।
सबसे छोटा भाई शाम को लौटा। उसने बताया- बॉस, जहाज में 100 टीवी है, जिसमे से 80 नए हैं, और बीस पुराने है, और लगभग 10 हजार मीटर ऊंचे दर्जे का सिल्क हैं। मैंने कुछ कपडा व्यापारियों से बात की है। वो हमें अच्छे भाव देने को तैयार है। 500 जापानी कंप्यूटर है, और पुरे नए है। मैं कुछ कंप्यूटर वालो को साथ ले गया था। वो लोग कंप्यूटर हमसे ले लेंगे। हमारा पूरा माल निकल जायेगा। मैंने खरीदी और बिक्री का हिसाब लगा लिया है।
इस सौदे में 10 लाख का मुनाफा है। बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों तैयार है। आप हाँ कहिये, तो में डील फाइनल करता हूँ।
इतना कहते ही प्रमुख ने मुस्कुराकर पिता की और देखा। वही बैठे पिता को अपना उत्तर मिल चूका था की क्यों उनकी तनख्वाह में इतना फर्क है।
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संसार के अधिकांश लोग इन्ही तीन श्रेणियों में आते है, अब हमे चुनाव करना है की हम किस श्रेणी में आना चाहते है।
तो दोस्तों कैसी लगी आपको ये छोटी सो स्टोरी, कमैंट्स बॉक्स में अपने विचार और अपनी राय जरूर डाले।
तो मिलते है, आगे कुछ और अच्छी कहानी या टॉपिक को लेकर।
धन्यवाद्।
आपका दोस्त
मुकेश चौहान।


Heart touching story
ReplyDeleteThanks
Deleteबहुत बढिया भाई साहब
ReplyDeleteThanks Bhai
ReplyDeleteA wonderful book of power thinking
ReplyDeleteSuperb
ReplyDeleteलाजवाब भाषा शैली है ।
ReplyDeleteबहुत शानदार लेख है ।।।
ईश्वर की कृपा आप पर बनी रहे और आप ऐसीही रोचक लेख हम तक पहुंचते रहे ।