दोस्तों हम बहुत जल्दी अपनी उम्मीद छोड़ देते है, जबकि हम मंजिल के बहुत करीब होते है।
जापान में घटी ये एक सच्ची घटना है। दस वर्ष पुराने एक मकान में परिवर्तन करने के लिए एक दीवार को तोड़ने की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। अचानक मजदूरों ने देखा की दीवार के भीतरी हिस्से में एक छिपकली गड़ी हुई है । उसे जिन्दा देख कर सब हैरान हो गए।
मकान मालिक भी ये देख कर आश्चर्यचकित हो गया। दस साल पहले किसी को दीवार पर चुन दिया गया हो और वह जिन्दा हो, यह एक हैरतअंगेज बात थी।
सब अचरज में थे की आखिर इस छिपकली को भोजन कहा से मिलता है।
कुछ देर बाद सबकी आँखे फटी रह गई, जब उन्होंने एक दूसरी छिपकली को मुँह में खाना दबाये आते देखा। दीवार के एक छोटे से छेद की मदद से उसने इस छिपकली के मुँह में भोजन पंहुचा दिया। यह सोचकर सभी के रोंगटे खड़े हो गये की दस साल तक रोज वह छिपकली दीवार में फंसी साथी छिपकली को जिन्दा रखने के लिए भोजन लाती रही। सिर्फ उम्मीद के भरोसे उसने अपने साथी को इतने वर्ष जिन्दा रखा। यह अद्भुत कहानी एक अमूल्य सन्देश देती है की जब तक जिंदगी में आखिरी किरण है, शरीर में आखिरी सांस है, तब तक उम्मीद मत छोड़ो। उम्मीद है तो जिंदगी है। आपकी उम्मीद और विश्वास आपके साथ अन्य लोगो को भी जिंदगी दे सकता है।
"दोस्तों, धन की कमी से बड़ा संकट है "उम्मीद की कमी" ।
यदि आपके भीतर उम्मीद जिन्दा है, यदि आप आशावादी है, तो आप समृद्धि को पुनः जीवन में प्राप्त कर सकते है। आपके पास उम्मीद है, तो ही आप जीवन में "सम्भावनाओ" पर चिंतन कर सकते है। यदि उम्मीद ही नहीं रही, तो सम्भावनाओ के जिन्दा रहने का प्रश्न ही नहीं उठता है।
इसलिए आप चाहे जितनी भी मुश्किलों से घिरे हो, सदा याद रखियेगा की कोई भी मुश्किल स्थायी नहीं होती। अपनी उम्मीदे जिंदा रखिये, डटे रहिये, हर रात के बाद सवेरा होना निश्चित है। लेकिन यह भी याद रखिये बिना कार्य किये सिर्फ उम्मीद रखने से कोई हल नहीं निकलेगा। उस छिपकली ने दस साल तक अपनी साथी छिपकली को भोजन पहुचाने के लिए अथाह मेहनत की। चुकी वह भोजन पहुँचाती रही, इसलिए उसका उम्मीद रखना जायज था। इसलिए आप चाहे जितनी भी मुश्किलों से घिरे हो, सदा याद रखियेगा की कोई भी मुश्किल स्थायी नहीं होती। अपनी उम्मीदे जिंदा रखिये, डटे रहिये, हर रात के बाद सवेरा होना निश्चित है। लेकिन यह भी याद रखिये बिना कार्य किये सिर्फ उम्मीद रखने से कोई हल नहीं निकलेगा। उस छिपकली ने दस साल तक अपनी साथी छिपकली को भोजन पहुचाने के लिए अथाह मेहनत की। चुकी वह भोजन पहुँचाती रही, इसलिए उसका उम्मीद रखना जायज था।
दुनिया में ऐसे अनेक लोग है जो घर बैठे यह उम्मीद पाले रहते है, की एक दिन किस्मत उन पर मेहरबान होगी, या कभी न कभी उनका दिन भी आएगा।
कुछ ऐसे भी लोग हे जो उम्मीद तो बड़ी रखते है। परन्तु उनका कर्म उस उम्मीद के अनुपात में नहीं होता इसलिए वो अपेक्षित ऊंचाई प्राप्त नहीं कर पाते।
उम्मीद अवश्य रखिये परन्तु अपनी उम्मीद को हकीकत में बदलने के लिए उतना कर्म भी कीजिये।
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आपका दोस्त
मुकेश चौहान
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