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Tuesday, July 14, 2020

उम्मीद है तो जिंदगी है। - Ummid hai to Zindagi hai.

उम्मीद है तो जिंदगी है।
दोस्तों हम बहुत जल्दी अपनी उम्मीद छोड़ देते है, जबकि हम मंजिल के बहुत करीब होते है। 

जापान में घटी ये एक सच्ची घटना है। दस वर्ष पुराने एक मकान में परिवर्तन करने के लिए एक दीवार को तोड़ने की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। अचानक मजदूरों ने देखा की दीवार के भीतरी हिस्से में एक छिपकली गड़ी हुई है । उसे जिन्दा देख कर सब हैरान हो गए। 
मकान मालिक भी ये देख कर आश्चर्यचकित हो गया। दस साल पहले किसी को दीवार पर चुन दिया गया हो और वह जिन्दा हो, यह एक हैरतअंगेज बात थी। 

सब अचरज में थे की आखिर इस छिपकली को भोजन कहा से मिलता है। 
कुछ देर बाद सबकी आँखे फटी रह गई, जब उन्होंने एक दूसरी छिपकली को मुँह में खाना दबाये आते देखा। दीवार के एक छोटे से छेद की मदद से उसने इस छिपकली के मुँह में भोजन पंहुचा दिया। यह सोचकर सभी के रोंगटे खड़े हो गये की दस साल तक रोज वह छिपकली दीवार में फंसी साथी छिपकली को जिन्दा रखने के लिए भोजन लाती रही।  सिर्फ उम्मीद के  भरोसे उसने अपने साथी को इतने वर्ष जिन्दा रखा। यह अद्भुत कहानी एक अमूल्य सन्देश देती है की जब तक जिंदगी में आखिरी किरण है, शरीर में आखिरी सांस है, तब तक उम्मीद मत छोड़ो। उम्मीद है तो जिंदगी है। आपकी उम्मीद और विश्वास आपके साथ अन्य लोगो को भी जिंदगी दे सकता है। 

"दोस्तों, धन की कमी से बड़ा संकट है  "उम्मीद की कमी" । 
यदि आपके भीतर उम्मीद जिन्दा है, यदि आप आशावादी है, तो आप समृद्धि को पुनः जीवन में प्राप्त कर सकते है। आपके पास उम्मीद है, तो ही आप जीवन में "सम्भावनाओ" पर चिंतन कर सकते है।  यदि उम्मीद ही नहीं रही, तो सम्भावनाओ के जिन्दा रहने का प्रश्न ही नहीं उठता है। 
इसलिए आप चाहे जितनी भी मुश्किलों से घिरे हो, सदा याद रखियेगा की कोई भी मुश्किल स्थायी नहीं होती।  अपनी उम्मीदे जिंदा रखिये, डटे रहिये, हर रात के बाद सवेरा होना निश्चित है। लेकिन यह भी याद रखिये बिना कार्य किये सिर्फ उम्मीद रखने से कोई हल नहीं निकलेगा। उस छिपकली ने दस साल तक अपनी साथी छिपकली को भोजन पहुचाने के लिए अथाह मेहनत की। चुकी वह भोजन पहुँचाती रही, इसलिए उसका उम्मीद रखना जायज था। इसलिए आप चाहे जितनी भी मुश्किलों से घिरे हो, सदा याद रखियेगा की कोई भी मुश्किल स्थायी नहीं होती।  अपनी उम्मीदे जिंदा रखिये, डटे रहिये, हर रात के बाद सवेरा होना निश्चित है। लेकिन यह भी याद रखिये बिना कार्य किये सिर्फ उम्मीद रखने से कोई हल नहीं निकलेगा। उस छिपकली ने दस साल तक अपनी साथी छिपकली को भोजन पहुचाने के लिए अथाह मेहनत की। चुकी वह भोजन पहुँचाती रही, इसलिए उसका उम्मीद रखना जायज था। 
दुनिया में ऐसे अनेक लोग है जो घर बैठे यह उम्मीद पाले रहते है, की एक दिन किस्मत उन पर मेहरबान होगी, या कभी न कभी उनका दिन भी आएगा। 
कुछ ऐसे भी लोग हे जो उम्मीद तो बड़ी रखते है। परन्तु उनका कर्म उस उम्मीद के अनुपात में नहीं होता इसलिए वो अपेक्षित ऊंचाई प्राप्त नहीं कर पाते। 
उम्मीद अवश्य रखिये परन्तु अपनी उम्मीद को हकीकत में बदलने के लिए उतना कर्म भी कीजिये। 

दोस्तों आप अपनी राय और अपने विचार मुझे जरूर कमेंट्स करे।  आप आपके सुझाव मुझे इ मेल भी कर सकते है। 
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धन्यवाद्। 
आपका दोस्त
मुकेश चौहान 
e-mail :- mukeshchouhan1987@gmail.com




Sunday, May 31, 2020

What is Happiness - खुशी क्या है ?

What is Happiness - खुशी क्या है ?

हेलो दोस्तों में मुकेश आपके लिए लेकर आया हूँ, खुश होने का सबसे आसान तरीका। हम सब खुश तो रहना चाहते है, मगर खुश नहीं रह पाते आखिर ऐसा क्यों ?
तो आइये जानते है - खुश होने का सबसे आसान तरीका।  


खुशी एक ऐसा शब्द है जिसको सुनते ही एक Positive Feelings आ जाती है, ख़ुशी अपने अंदर से पैदा होती है। इसे आप स्थाई रूप से नहीं खरीद सकते, इसे आप वसीयत में नहीं पा सकते।
ख़ुशी आपको शिकायत से नहीं मिल सकती।
लेकिन- ..... ख़ुशी आप पैदा कर सकते है, खुशी को आप आज और अभी जी सकते है।  आप कही भी खुश रह सकते है। बशर्ते आप खुश रहना चाहे तो। 

पूरी ख़ुशी या आधी ख़ुशी जैसी कोई चीज नहीं होती। खुशी सिर्फ ख़ुशी होती है। यदि आप सोचते है की मुझे अमुक चीज हासिल होगी तो में खुश रहूँगा, तो आप जीवन भर असंतुष्ट रहेंगे। 

आप आज का धन्यवाद् करते हुए जिंदगी जी सकते है। 
आप स्वस्थ है, आपके पास घर है, हसने बोलने के लिए परिवार है, रोजी रोटी कमाने के लिए हुनर है। 
साथ देने के लिए दोस्त है, क्या यह खुश रहने का कारण नहीं है। सब कुछ छोड़िये, क्या आप आज तक जिन्दा है, यह ख़ुशी का कारण नहीं है। 

लेकिन आज-कल देखने में आ रहा है कि  लोग काम करते जा रहे है, लेकिन उसमे ख़ुशी का नामोनिशान तक नहीं है। लोगो के दिल से ख़ुशी कही गायब सी हो गयी है।  प्रैक्टिकल बनिए और इस सच को स्वीकार कीजिये कि इस दुनिया में कोई भी शत प्रतिशत सुखी नहीं हो सकता। 
इसलिए अपने जीवन के हर क्षण को डट कर जियो, जम कर जियो, ख़ुशी से जियो, मुस्कराहट के साथ जियो। 

तो दोस्तों आप ही सोचिये भूत जोकि गुजर चूका है, उस पर हमारा कोई बस नहीं जिसे हम चाह कर भी बदल नहीं सकते, जिससे सिर्फ हम सिख सकते है। 
और भविष्य के बारे में चिंता करने से कोई फायदा नहीं, उसके लिए हमें योजना बनानी चाहिए। 
अब रही बात वर्तमान की ये हमारे हाथो में है।  इसे हम खुलकर जी सकते है, ख़ुशी से जी सकते है।  और जिना ही चाहिए।  
तो देर किस बात की, ख़ुशी आपके अपने अंदर ही है, इसे तलाशना शुरू कीजिये दोस्तों।  
और सही मायने में जीना शुरू कीजिये।  
हर वो अच्छा काम जो आपको करना ख़ुशी देता है आज से ही करना शुरू कीजिये। 

दोस्तों हम आदतों के गुलाम है, हर काम से नाखुश होना भी एक आदत है। इस आदत को जितनी जल्दी हो सके बदल दीजिये। यही आदत हमें  खुश होने में सबसे बड़ी बाधा है। खुश होने के लिए किसी पर निर्भर होने की कोई जरुरत नहीं होती। ख़ुशी को अपने अंदर से ही ढूंढ निकालिये। 
खुश रहना भी जब हमारी आदत में आ जायेगा तो जीवन जीना और आसान हो जायेगा।

दोस्तों आप अपनी राय और अपने विचार मुझे जरूर कमैंट्स करे। आप आपके सुझाव भी मुझे 
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धन्यवाद्। 
आपका दोस्त 
मुकेश चौहान 

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Sunday, May 24, 2020

Power of Language - पावर भाषा

Power of Language - पावर भाषा 

हेलो दोस्तों में मुकेश आज फिर आपके लिए लेकर आया हु एक छोटी सी स्टोरी, वैसे पढ़ने में तो ये बहुत ही छोटी सी कहानी है। 
लेकिन इसका प्रभाव अपने  निजी जीवन में बहुत बड़ा पड़ेगा इसकी पूरी गारंटी है। जिस भाषा प्रयोग हम अपने जीवन में रोज रोज करतें है। 
लेकिन उसका प्रभाव क्या पड़ेगा उस पर हमने कभी गौर ही नहीं किया।  चुकी ये हमारे पुरे जीवन का सवाल है, तो हमें इसके सुधार पर काम करना ही पड़ेगा। 

                                                    mukneet.blogspot.com#   poweroflanguage#

एक समय की बात है एक फर्नीचर स्टोर के मालिक मुझसे परिचित थे। ख़रीददारी के बाद बिलिंग के दौरान उन्होंने मुझसे पूछा- कैसे हो सर। 
मैंने कहा - बस, ठीक हूँ। 

उन्होंने पलटकर पूछा - ठीक क्यों है, "अच्छे " क्यों नहीं है। 

मैं इस प्रश्न से अचकचा गया - अच्छा हूँ कहकर वहा से निकलने की कोशिश की।
उन्होंने फिर पलटकर कहा - सिर्फ अच्छे क्यों है सर, आपको तो "बहुत अच्छा" होना चाहिए।  

मैंने झेपते हुए कहा-  बहुत अच्छा हूँ भाई। 

असहज होकर मैं वहा से निकल आया, लेकिन घर पहुंच कर इस घटना पर विचार करता रहा।  आखिर क्यों जीवन के बारे में इतना निराशाजनक जवाब दिया ? 
क्यों उत्साहित और प्रफुल्लित नहीं था ? 
क्या मैंने उस प्रश्न को महत्वपूर्ण नहीं समझा या वाकई मेरे मन में उत्साह की कमी थी ?
किन परिस्तिथियों में हमारे  मुँह से ऐसी भाषा निकलती है ?
मैंने कुछ अन्य लोगो से भी पूछा - "आप कैसे है" ? पूछने पर अलग- अलग जवाब मिले। 
उदाहरण -

एक सज्जन ने कहा - बस कट रही है। 
दूसरे सज्जन - जी रहे है। 
तीसरे सज्जन - ठीक हूँ। 

   सार कहु तो कुछ उत्तर ऐसे थे मानो उन लोगो ने जिंदगी को जीना अभी शुरू ही नहीं किया हो। कुछ उत्तर ऐसे थे मानो जबरदस्ती जिंदगी जी रहे है। 
दो सज्जन  तो ऐसे उदास , निराश और हताश थे मानो वो मुर्दा ही पैदा हुए थे।  आंकड़ों में कहूं तो बीस में से चार लोग ऐसे थे, जिन्होंने ऊर्जा से भरे जिंदादिल जवाब दिए।  
जैसे - "फर्स्ट क्लास चल रही है, फैंटास्टिक और शानदार " ये जवाब जिन्दा लोगो के थे। 

आप अपनी आदत पर गौर कीजिये।  जब कोई आपसे हाल चाल पूछे तो दुनिया के सबसे खुश और जिंदादिल आदमी की तरह जवाब दीजिये। 

*** पावर योजना ***
  • अपनी भाषा का नियमित निरीक्षण कीजिये। 
  • उदासी, हताशा, हीनता भरे शब्दों को हटाकर जोश, जीत, ख़ुशी और विश्वाश भरे शब्दों का प्रयोग कीजिये। 
  • "मुँह खोले तो अच्छा बोले " का सिद्धांत अमल में लाइए। 
  • आपसे मिलकर दुसरो की जिंदगी में भी जोश पैदा हो जाये, आज से ऐसी भाषा का प्रयोग कीजिये 

तो दोस्तों कैसी लगी आपको ये छोटी सो स्टोरी, कमैंट्स बॉक्स में अपने विचार और अपनी राय जरूर डाले। या आप मुझे इ मेल कर सकते है, mukeshchouhan1987@gmail.com पर। 

तो मिलते है, आगे कुछ और अच्छी कहानी या टॉपिक को लेकर। 

धन्यवाद्। 

आपका दोस्त 
मुकेश चौहान।
mukeshchouhan1987@gmail.com
#mukneet.blogspot.com


Friday, May 22, 2020

Power Thinking - पावर थिंकिंग

आप किस श्रेणी के है। 

हेलो दोस्तों में मुकेश आपके लिए लाया हु एक छोटी सी स्टोरी डॉ उज्जवल पाटनी की पॉवरफुल बुक " पावर थिंकिंग " से अगर आप एक बुक लवर है तो आपने ये बुक जरूर पढ़ी होगी, और अगर नहीं पढ़ी तो आपको ये बुक पढ़नी चाहिए। 
पावर थिंकिंग पॉजिटिव थिंकिंग से आगे बढ़कर प्रैक्टिकल, शक्तिशाली, आत्मनिर्भर, और दूरदर्शी बनने की राह दिखाती है। 
इसके लिए हमें पॉजिटिव थिंकिंग को त्यागना नहीं है, परन्तु एक कदम आगे बढ़कर पावर थिंकिंग को अपनाना है। 



तीन भाइयो ने पढाई के बाद नौकरी के लिए शहर का रुख किया। सयोंगवश उनकी नौकरी एक ही कंपनी में लग गयी। 
विदेश में नौकरी करने वाले उनके पिता जब दो साल बाद वापस लौटे तो पुत्रो की तरक्की देख कर बहुत खुश हुए। 
उन्होंने तीनो पुत्रो से उनकी तनख्वाह पूछी। बड़े ने कहा 30 हजार, मंझले ने कहा 40 हजार, और सबसे छोटे ने कहा 60 हजार। 

पिता चकित हो गए क्योकि एक जैसी डिग्री और एक ही कंपनी में नौकरी के बाद भी तनख्वाह में बेहद फर्क था। पिता अगले दिन कंपनी के प्रमुख से मिले और इसका कारण पूछा। प्रमुख ने पिता से कहा- की वो उनके साथ बैठकर स्वयं देखे। 

कंपनी प्रमुख ने बड़े पुत्र को बुलाया और कहा - पास ही समुद्र तट पर एक जहाज में कुछ माल है, जिसकी नीलामी होने जा रही है। तुरंत पता करो क्या माल है, और क्या कुछ लाभ का सौदा हो सकता है। यही कार्य अन्य दो भाइयो को भी सौपा। 

सबसे बड़ा भाई 10 मिनट में लौटकर चला आया। उसने जानकारी दी कि जहाज में कुछ कपडा और कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान है। 
प्रमुख ने पूछा - यह कैसे पता चला। बड़े भाई ने कहा - किसी परिचित से फ़ोन करके पूछा है। 

मंझला भाई लगभग दो घंटे बाद लौटकर आया। उसने बताया की जहाज में 100 टीवी है, लगभग 10 हजार मीटर कपडा है, और 500 कंप्यूटर है। 
प्रमुख ने पूछा - टीवी चालू है या बंद, कपडा किस क्वालिटी का है, और कंप्यूटर किस कंपनी का है।  मंझले भाई ने कहा- इतनी बारीक़ जानकारी पूछने के लिए आपने कहा नहीं था, इसलिए नहीं पूछा। 

सबसे छोटा भाई शाम को लौटा।  उसने बताया- बॉस, जहाज में 100 टीवी है, जिसमे से 80 नए हैं, और बीस पुराने है, और लगभग 10 हजार मीटर ऊंचे दर्जे का सिल्क हैं।  मैंने कुछ कपडा व्यापारियों से बात की है। वो हमें अच्छे भाव देने को तैयार है। 500 जापानी कंप्यूटर है, और पुरे नए है। मैं कुछ कंप्यूटर वालो को साथ ले गया था। वो लोग कंप्यूटर हमसे ले लेंगे।  हमारा पूरा माल निकल जायेगा। मैंने खरीदी और बिक्री का हिसाब लगा लिया है। 
इस सौदे में 10 लाख का मुनाफा है।  बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों तैयार है। आप हाँ कहिये, तो में डील फाइनल करता हूँ। 

इतना कहते ही प्रमुख ने मुस्कुराकर पिता की और देखा। वही बैठे पिता को अपना उत्तर मिल चूका था की क्यों उनकी तनख्वाह में इतना फर्क है। 

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संसार के अधिकांश लोग इन्ही तीन श्रेणियों में आते है, अब हमे चुनाव करना है की हम किस श्रेणी में आना चाहते है। 
तो दोस्तों कैसी लगी आपको ये छोटी सो स्टोरी, कमैंट्स बॉक्स में अपने विचार और अपनी राय जरूर डाले। 

तो मिलते है, आगे कुछ और अच्छी कहानी या टॉपिक को लेकर। 

धन्यवाद्। 

आपका दोस्त 
मुकेश चौहान।
 

Tuesday, May 19, 2020

Simple Home made Senitizer - घर पर ही बनाये सेनिटाइज़र

आइये घर पर ही बनाते है सेनिटाइज़र कुछ आसान स्टेप में। 

सामग्री - Ingredient

१) नीम के पत्ते - २०० ग्राम 
२) तुलसी के पत्ते- २० पत्ते के आस पास  
३) कपूर - एक छोटा टुकड़ा 
४) फिटकरी - एक छोटा टुकड़ा 
५) पानी - १ लीटर 

बनाने की विधि । 
सबसे पहले नीम के पत्ते लेंगे , और उन्हें सादे पानी में भीगोएंगे कुछ समय के लिए जिससे उनके ऊपर लगी धुल अच्छी तरह से निकल जाये। 
अब इसके बाद हम गैस पर १ लीटर के करीब जो हमने पानी लिया है, वो गर्म करने के लिए रखेंगे। 
पानी जब हल्का सा गर्म हो जाये फिर हम उसमे साफ़ किये हुए नीम के पत्ते और तुलसी के पत्ते डालेंगे। 
अब इस पानी को हमें पूरी आंच पर जब तक गरम करना है, तब तक की १ लीटर पानी 750 ML या उसके आस पास ना रह जाये। 
जिससे हमें ये पता चलता है की पानी अच्छी तरह से उबल गया है, और नीम और तुलसी के पत्ते के 
के सारे गुण उसमे समाहित हो गए है।  अब हम इसे थोड़ी देर के लिए ठंडा होने के लिए रखेंगे, ज्यादा ठंडा नहीं करना है, पानी जब गुनगुना रह जाये फिर अब हम उसमे कपूर और फिटकरी को बारीक़ पीस कर उस पानी के घोल में मिला देंगे।  और उस बर्तन को पूरी तरह से ढक देंगे कुछ समय के लिए जिससे की कपूर उसमे से उड़ न जाये। अब थोड़ी देर बाद हम बर्तन (तपेली )में से ढक्कन हटा देंगे।  अब आप चाहे तो उस घोल को चलनी से छान भी सकते है। और ये अब तैयार हो गया हमारा घरेलु सेनेटाइजर, अब इसे स्प्रे बोतल में भर ले, और इसका उपयोग करे। 

तो दोस्तों कैसा लगा आपको ये घरेलु सेनेटाइजर बनाने की एकदम सिंपल विधि। 
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धन्यवाद्। 

आपका दोस्त 
मुकेश चौहान।
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