हेलो दोस्तों में मुकेश आज फिर आपके लिए लेकर आया हु एक छोटी सी स्टोरी, वैसे पढ़ने में तो ये बहुत ही छोटी सी कहानी है।
लेकिन इसका प्रभाव अपने निजी जीवन में बहुत बड़ा पड़ेगा इसकी पूरी गारंटी है। जिस भाषा प्रयोग हम अपने जीवन में रोज रोज करतें है।
लेकिन उसका प्रभाव क्या पड़ेगा उस पर हमने कभी गौर ही नहीं किया। चुकी ये हमारे पुरे जीवन का सवाल है, तो हमें इसके सुधार पर काम करना ही पड़ेगा।
mukneet.blogspot.com# poweroflanguage#
एक समय की बात है एक फर्नीचर स्टोर के मालिक मुझसे परिचित थे। ख़रीददारी के बाद बिलिंग के दौरान उन्होंने मुझसे पूछा- कैसे हो सर।
मैंने कहा - बस, ठीक हूँ।
उन्होंने पलटकर पूछा - ठीक क्यों है, "अच्छे " क्यों नहीं है।
मैं इस प्रश्न से अचकचा गया - अच्छा हूँ कहकर वहा से निकलने की कोशिश की।
उन्होंने फिर पलटकर कहा - सिर्फ अच्छे क्यों है सर, आपको तो "बहुत अच्छा" होना चाहिए।
मैंने झेपते हुए कहा- बहुत अच्छा हूँ भाई।
असहज होकर मैं वहा से निकल आया, लेकिन घर पहुंच कर इस घटना पर विचार करता रहा। आखिर क्यों जीवन के बारे में इतना निराशाजनक जवाब दिया ?
क्यों उत्साहित और प्रफुल्लित नहीं था ?
क्या मैंने उस प्रश्न को महत्वपूर्ण नहीं समझा या वाकई मेरे मन में उत्साह की कमी थी ?
किन परिस्तिथियों में हमारे मुँह से ऐसी भाषा निकलती है ?
मैंने कुछ अन्य लोगो से भी पूछा - "आप कैसे है" ? पूछने पर अलग- अलग जवाब मिले।
उदाहरण -
एक सज्जन ने कहा - बस कट रही है।
दूसरे सज्जन - जी रहे है।
तीसरे सज्जन - ठीक हूँ।
सार कहु तो कुछ उत्तर ऐसे थे मानो उन लोगो ने जिंदगी को जीना अभी शुरू ही नहीं किया हो। कुछ उत्तर ऐसे थे मानो जबरदस्ती जिंदगी जी रहे है।
दो सज्जन तो ऐसे उदास , निराश और हताश थे मानो वो मुर्दा ही पैदा हुए थे। आंकड़ों में कहूं तो बीस में से चार लोग ऐसे थे, जिन्होंने ऊर्जा से भरे जिंदादिल जवाब दिए।
जैसे - "फर्स्ट क्लास चल रही है, फैंटास्टिक और शानदार " ये जवाब जिन्दा लोगो के थे।
आप अपनी आदत पर गौर कीजिये। जब कोई आपसे हाल चाल पूछे तो दुनिया के सबसे खुश और जिंदादिल आदमी की तरह जवाब दीजिये।
*** पावर योजना ***
- अपनी भाषा का नियमित निरीक्षण कीजिये।
- उदासी, हताशा, हीनता भरे शब्दों को हटाकर जोश, जीत, ख़ुशी और विश्वाश भरे शब्दों का प्रयोग कीजिये।
- "मुँह खोले तो अच्छा बोले " का सिद्धांत अमल में लाइए।
- आपसे मिलकर दुसरो की जिंदगी में भी जोश पैदा हो जाये, आज से ऐसी भाषा का प्रयोग कीजिये ।
तो दोस्तों कैसी लगी आपको ये छोटी सो स्टोरी, कमैंट्स बॉक्स में अपने विचार और अपनी राय जरूर डाले। या आप मुझे इ मेल कर सकते है, mukeshchouhan1987@gmail.com पर।
तो मिलते है, आगे कुछ और अच्छी कहानी या टॉपिक को लेकर।
धन्यवाद्।
आपका दोस्त
मुकेश चौहान।
mukeshchouhan1987@gmail.com
#mukneet.blogspot.com

बहुत सीमित शब्दों में बहुत गहरी बात है ।
ReplyDeleteअदभुत रचना है ।
बहुत सीमित शब्दों में बहुत गहरी बात है ।
ReplyDeleteअदभुत रचना है ।
nice story
ReplyDeleteKya baat h sir
ReplyDeleteGood very nice
Keep it up dear
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